सीवर प्रोजेक्ट को पूरी तरह फैल (डेड)मान लेना उचित नहीं, करीब 95 प्रतिशत लाइन बिछाने के साथ 50 प्रतिशत लाइन चालू
कुछ घटिया चैंबर निर्माण और अन्य विभागों की लापरवाही के कारण वर्तमान अधिकारियो को नहीं ठहराया जा सकता जिम्मेदार
हाईकोर्ट की फटकार के बाद जागा वन विभाग, अपनी गलती पर पर्दा डालने वर्तमान सहित 22 पूर्व अधिकारियो के विरुद्व कोर्ट में अपराधिक अभियोजन चलाने की शासन से मांग
मोहन विकट द पड़ताल खबर मो• 8103600829
शिवपुरी।शिवपुरी शहर को वर्ष 2011-12 में सीवर प्रोजेक्ट के रूप में एक बड़ी सौगात मिली थी, इस प्रोजेक्ट की शुरूआती लागत करीब 69 करोड़ थी जबकी इसे केवल 21 महीने में पूरा करना था लेकिन करीब 14-15 वर्ष गुजरने के बाद भी यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ और लागत बढ़कर 113 करोड़ रुपये हो गई। करीब 113 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल नहीं हुआ यह जनप्रतिनिधियों ने माना। लेकिन सबाल अब यह है कि इस प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत क्या है••?प्रोजेक्ट पर कितना काम हुआ है••? क्या प्रोजेक्ट को पूरी तरह फैल मान लिया जाना चाहिए••? जब इन सवालों की खोज की तो पता चला कि लगभग 50 प्रतिशत प्रोजेक्ट का कार्य सफल हुआ है।
बॉक्स- एक नजर प्रोजेक्ट के काम पर
सीवर प्रोजेक्ट के तहत शिवपुरी शहर में लगभग 93 किलोमीटर सीवर लाइन डाली जानी थी जो की लगभग पूरी डाली जा चुकी है। विभाग ने करीब 50 प्रतिशत लाइन चैक भी कर ली है बांकी जो 50 प्रतिशत का काम है वह अन्य विभागों की लापरवाही के कारण सीवर के चेंवर डैमेज और सीवर लाइन में मिट्टी भरे होने के कारण सफाई होना संभव नहीं है जिसकी वजह से लाइन चौक बनी हुई है। जिसमें शहर के बीचों-बीच से गुजरे नालों में बने सीवर के चेंबर भी शामिल हैं जो कि बरसात के कारण जगह-जगह से डैमेज होकर टूट गये और चेंबरों में मिट्टी-पत्थर, गंदगी भर गई जिसकी सफाई होना लगभग असंभव है।
बॉक्स- प्रोजेक्ट पूरी तरह से फैल नहीं
खास बात यह कि इस सीवर प्रोजेक्ट को पूरी तरह से फैलियर नहीं माना जा सकता क्योंकि करीब 50 प्रतिशत लाइन विभाग ने चैक कर ली है जो कि चालू है अगर नगर पालिका इस 50 प्रतिशत लाईन में कनेक्शन करती है तो लोगों को सीवर प्रोजेक्ट का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा।
बॉक्स- हाईकोर्ट की फटकार के बाद वन विभाग को नजर आई अपनी गलती।
दरअसल आदित्य पाण्डेय ने सांख्यसागर सहित शिवपुरी की अन्य झीलों को दूषित किये जाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है इस याचिका में हाईकोर्ट ने वन विभाग की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई है साथ ही शिवपुरी के सीवर प्रोजेक्ट को लेकर अपर मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिये थे। सांख्य सांगर झील में सीवर की गंदगी को लेकर वन विभाग ने वन्य जीव पर्यावरण को नुकसान मानते हुये नगर पालिका शिवपुरी के 15 तत्कालीन व वर्तमान सीएमओ तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, (पीएचई) के 7 कार्यपालन यंत्रियों, (ईई) के विरुद्व कोर्ट में अपराधिक अभियोजन चलाने के लिये शासन से अनुमति की मांग की है।
लेकिन सवाल यहां वन विभाग पर उठता है कि जिस समय सीवर प्रोजेक्ट की ले-आउट तैयार की गई थी क्या उस समय वन विभाग की आँखे पर पट्टी बंधी थी जो दिखाई नहीं दिया था कि सीवर का गंदा पानी कहां जायेगा। अब जब हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है तो विभाग को सीवर का गंदा पानी दिखाई देने लगा और वन्य जीवों को खतरा महशूस होने लगा। वन विभाग ने तत्कालीन अधिकारियों के साथ वर्तमान सीएमओ और ईई पर भी अपराधिक अभियोजन चलाने की शासन से मांग की है। जबकि वर्तमान सीएमओ यशवंत राठौर और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के ईई शुभम अग्रवाल की कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है क्योंकि यह प्रोजेक्ट पिछले करीब 14-15 सालों से चल रहा है वर्तमान में तो अधिकारी प्रोजेक्ट को सफल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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