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माधवराव सिंधिया जी के नाम पर आयोजित 'निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर को मज़ाक बना दिया जिला स्वास्थ्य विभाग ने - ब्रांडिंग मुंबई की, दवाएं जिला अस्पताल वाली: आखिर किसे गुमराह कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग के मुखिया••? - जो बाजार की दवा है उसे हम खरीद कर मरीज के घर भिजवा देंगे CMHO डॉ. संजय ऋषिश्वर

मंगलवार, 17 मार्च 2026

माधवराव सिंधिया जी के नाम पर आयोजित 'निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर को मज़ाक बना दिया जिला स्वास्थ्य विभाग ने 

- ब्रांडिंग मुंबई की, दवाएं जिला अस्पताल वाली: आखिर किसे गुमराह कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग के मुखिया••?

- जो बाजार की दवा है उसे हम खरीद कर मरीज के घर भिजवा देंगे CMHO डॉ. संजय ऋषिश्वर

माधवराव सिंधिया जी, CMHO 

शिवपुरी | जिला मुख्यालय पर आयोजित रोटरी क्लब और माधवराव सिंधिया ट्रस्ट के 'निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर' ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की कलई खोलकर रख दी है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और गैर-जिम्मेदाराना रवैया CMHO डॉ. संजय ऋषिश्वर का रहा, जिनके पास मरीजों की समस्याओं का समाधान तो नहीं था, लेकिन तीखे सवालों पर उनके पास एक 'अजीब' मुस्कुराहट और तर्कहीन जवाब जरूर थे।

विभागीय विफलता: जब CMHO बोले- 'दवाई घर भिजवा देंगे'

शिविर में दिल्ली और मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाकर बड़ी-बड़ी ब्रांडिंग की गई थी। लेकिन जब इन डॉक्टरों ने दवाइयां लिखीं, तो काउंटर पर वे उपलब्ध ही नहीं थीं। शिविर में वही दवाइयां बांटी जा रही थीं, जो आम दिनों में जिला अस्पताल के स्टोर में धूल खाती हैं।अब सवाल यह उठता है की जब विशेष दवाओं का स्टॉक नहीं था, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों का आडंबर क्यों रचा गया••? “पत्रकार वार्ता में जब CMHO से पूछा गया कि मरीज बाजार की महंगी दवाएं कैसे खरीदेगा, तो उन्होंने बेहद हल्के अंदाज में कहा— "जो बाजार की दवा है, उसे हम खरीद कर मरीज के घर भिजवा देंगे।" यह बयान न केवल हास्यास्पद है, बल्कि जिला स्वास्थ्य प्रमुख की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा करता है।

आंकड़ों की बाजीगरी में उलझे स्वास्थ्य प्रमुख

शिविर में एमआरआई (MRI) जांच को लेकर जो आंकड़े पेश किए गए, उसने विभाग की साख को पूरी तरह धूमिल कर दिया है। शहर में मात्र एक निजी एमआरआई मशीन उपलब्ध है। “एक एमआरआई स्कैन में औसतन 30 मिनट लगते हैं। जिम्मेदारों ने 73 एमआरआई होने का दावा कर दिया, जो वैज्ञानिक रूप से उस समय सीमा में संभव ही नहीं था। जब इस 'जादुई आंकड़े' पर CMHO और रोटरी क्लब के पदाधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो वे एक-दूसरे का मुंह ताकते रह गए।

क्या CMHO केवल 'मैनेजमेंट' के लिए हैं••?

पत्रकार वार्ता के दौरान स्थिति तब और भी असहज हो गई जब रोटरी क्लब के पदाधिकारी हर तकनीकी सवाल पर CMHO की ओर मदद की उम्मीद से देखने लगे। लेकिन डॉक्टर ऋषिश्वर के पास न तो मरीजों के भटकने का कोई जवाब था और न ही अव्यवस्थाओं को सुधारने का कोई ठोस रोडमैप। ऐसा प्रतीत हुआ कि विभाग का पूरा अमला केवल कागजों पर 'आंकड़ों का महल' खड़ा करने में जुटा है ताकि ऊपरी स्तर पर वाहवाही लूटी जा सके।

विभाग से सीधे सवाल

क्या विभाग ने शिविर से पहले दवाओं की उपलब्धता की सूची चेक नहीं की थी••? “क्या CMHO लिखित में गारंटी देंगे कि हर उस मरीज के घर दवा पहुंचेगी जिसे शिविर में दवा नहीं मिली••? ”एमआरआई के फर्जी आंकड़ों के जरिए किसे गुमराह करने की कोशिश की जा रही है••? 

जनता के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ और विभाग प्रमुख का इस पर मुस्कुराना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए 'खतरे की घंटी' है। यह शिविर सेवा कम और विभागीय इवेंट मैनेजमेंट ज्यादा नजर आ रहा है।

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