सिपाहियों की 'गुंडागर्दी' की भेंट चढ़ेगी टीआई की कुर्सी•••? रन्नोद में आरक्षकों की अनुशासनहीनता ने थाना प्रभारी को खड़ा किया कटघरे में
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| भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत निर्देश देते |
शिवपुरी (रन्नोद)। पुलिस महकमे में एक पुरानी कहावत है "गलती करे सिपाही और भरा जाए टीआई।" रन्नोद थाने में शनिवार को हुई हिंसक घटना ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिया है। महज 500 रुपये के चालान को लेकर आरक्षकों द्वारा की गई बर्बरता और गर्भवती महिला से बदसलूकी के मामले में अब गाज थाना प्रभारी अरविन्द चौहान पर गिरती नजर आ रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि इस पूरे फसाद में थाना प्रभारी की कोई सीधी गलती नजर नहीं आ रही।
आरक्षकों का अहंकार, टीआई लाचार!
शनिवार को रन्नोद थाने के सामने रूटीन चेकिंग चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विवाद शुरू हुआ तब मौके पर तैनात आरक्षक खुद को 'सुपर टीआई' समझकर आम जनता पर रौब झाड़ रहे थे। जब एक युवक ने चालान कटवा लिया, उसके बावजूद आरक्षकों ने अपनी शालीनता खो दी और बात मारपीट तक पहुँचा दी। आरोप है कि वर्दी के नशे में चूर इन आरक्षकों ने न केवल युवक की उंगली चबाई, बल्कि बीच-बचाव करने आई उसकी गर्भवती बहन के साथ भी अभद्रता की।
इस पूरी घटना के दौरान थाना प्रभारी अरविन्द चौहान मौके पर उस विवाद का हिस्सा नहीं थे, लेकिन आरक्षकों की इस अनुशासनहीनता ने उन्हें जनता और जनप्रतिनिधियों के निशाने पर ला खड़ा किया है।
"मेरी गलती हो तो इस्तीफा दे दूँ"— टीआई का छलका दर्द
मामला तूल पकड़ते ही देर रात भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव भारी भीड़ के साथ थाने पहुँचे और थाना प्रभारी को सस्पेंड करने की मांग पर अड़ गए। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि थाना प्रभारी अरविन्द चौहान को भरे गले से कहना पड़ा— "अगर इस पूरे मामले में मेरी रत्ती भर भी गलती हो, तो मैं आज ही नौकरी से इस्तीफा देने को तैयार हूँ।"
टीआई का यह बयान साफ झलकाता है कि वे अपने मातहत कर्मचारियों (आरक्षकों) की मनमर्जी और बदतमीजी से कितने आहत हैं। आरक्षकों की बदजुबानी और हाथ छोड़ने की आदत ने एक शालीन अधिकारी की छवि को दांव पर लगा दिया है।
जिले में पुलिसिंग फेल: SP साहब! आरक्षकों को लगाम लगाइए
पिछले 4 दिनों में नरवर, भौंती, करैरा और अब रन्नोद में हुए विवाद एक ही कहानी बयां कर रहे हैं— शिवपुरी पुलिस के आरक्षकों में अनुशासन और धैर्य की भारी कमी है। आम जनता का कहना है कि पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ को अब सख्त होना पड़ेगा। चालानी कार्यवाही के नाम पर आरक्षकों की 'गुंडागर्दी' बंद होनी चाहिए। जो आरक्षक वर्दी का रौब दिखाकर गर्भवती महिलाओं और आम नागरिकों पर हाथ उठाते हैं, उन पर सीधी FIR होनी चाहिए, न कि उनके टीआई को बलि का बकरा बनाया जाए।
रन्नोद की इस घटना ने साफ कर दिया है कि जब तक सड़कों पर तैनात आरक्षकों को 'जनता से बात करने का सलीका' नहीं सिखाया जाएगा, तब तक जिले के ईमानदार थाना प्रभारियों की कुर्सियां ऐसे ही संकट में पड़ती रहेंगी। फिलहाल, रन्नोद में तनाव बरकरार है और मांग की जा रही है कि निर्दोष टीआई के बजाय उन दोषी आरक्षकों पर कार्यवाही हो जिन्होंने खाकी को कलंकित किया है।

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