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खाकी की चुप्पी या रसूख का दबाव••? हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी कोतवाली पुलिस की पकड़ से दूर सफेदपोश आरोपी शिवपुरी पुलिस की साख दांव पर : रसूख के आगे बेबस वर्दी : हाईकोर्ट से दो बार जमानत ख़ारिज फिर भी पुलिस की पकड़ से वहार ज़मीन कारोबारी

शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

खाकी की चुप्पी या रसूख का दबाव••? हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी कोतवाली पुलिस की पकड़ से दूर सफेदपोश आरोपी 

शिवपुरी पुलिस की साख दांव पर : रसूख के आगे बेबस वर्दी : हाईकोर्ट से दो बार जमानत ख़ारिज फिर भी पुलिस की पकड़ से वहार ज़मीन कारोबारी 

भोला जैन, प्रधुमन वर्मा 

शिवपुरी। कानून की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी है, यह तो सुना था, लेकिन शिवपुरी की सिटी कोतवाली पुलिस ने तो अपनी आंखों पर 'रसूख' का चश्मा चढ़ा लिया है। जमीन धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के गंभीर मामले में करीब 500 दिनों से कागजों में 'फरार' चल रहे भाजपा नेता नरेंद्र जैन भोला न केवल खुलेआम घूम रहे हैं, बल्कि पुलिस की नाक के नीचे सरकारी दफ्तरों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। 

हाईकोर्ट से दो बार झटका, फिर भी पुलिस को 'नहीं दिखते' आरोपी

मामला बेहद संगीन है। नरेंद्र जैन भोला, उनके बेटे हर्षित जैन और मुनीम महेश शर्मा पर धारा 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत कूट रचित दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज है। माननीय उच्च न्यायालय (High Court) ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को एक बार नहीं, बल्कि दो बार (हालिया 27 जनवरी 2026) खारिज कर दिया है। इसके बावजूद पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम है, या यूं कहें कि पकड़ना ही नहीं चाहती••? 

फर्जीवाड़े का वो 'खेल' जो खुद गले की फांस बन गया

इस पूरे घटनाक्रम की नींव 22 दिसंबर 2023 को पड़ी थी। भाजपा नेता नरेंद्र जैन भोला ने प्रद्युम्न वर्मा और उनके साथियों पर 85 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए धारा 420 और 406 के तहत मामला दर्ज कराया था। लेकिन न्याय की इस लड़ाई में मोड़ तब आया जब नरेंद्र जैन ने न्यायालय में एक 'विक्रय अनुबंध' (दिनांक 15 मार्च 2023) पेश किया।प्रद्युम्न वर्मा ने जब इस अनुबंध की नकल निकलवाई तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। वर्मा ने साक्ष्यों के साथ दावा किया कि जिस तारीख (15 मार्च) को यह अनुबंध शिवपुरी में बना बताया जा रहा है, उस दिन वे और उनके भाई शहर में थे ही नहीं। वे 14 मार्च की रात को ही विदेश से लौटे थे और उनके भाई इंदौर के अस्पताल में भर्ती थे। इस अकाट्य सबूत के बाद पुलिस ने उल्टा नरेंद्र जैन भोला, उनके बेटे हर्षित और मुनीम महेश शर्मा पर धारा 420, 467, 468, 471 के तहत जालसाजी का मामला दर्ज किया था।  

क्या खाकी पर 'सफेदपोश का दबाव है •••? 

दस्तावेजों के फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी पुलिस को ठेंगा दिखा रहा है। रजिस्ट्रार ऑफिस जैसे सार्वजनिक और सरकारी स्थान पर आरोपी की मौजूदगी यह साबित करती है कि उसे कोतवाली पुलिस का रत्ती भर भी खौफ नहीं है यह स्थिति न केवल पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल उठाती है, बल्कि न्यायपालिका के आदेशों की भी अवहेलना प्रतीत होती है। शहर की जनता अब यह पूछ रही है कि आखिर ऐसी कौन सी शक्ति है जो कोतवाली पुलिस के हाथों को इन आरोपियों की गिरेबान तक पहुँचने से रोक रही है•••? जब आरोपी का लोकेशन और मौजूदगी सगाई जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में थी, तो दबिश क्यों नहीं दी गई•••? हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज होने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए 'विशेष टीम' क्यों नहीं बनाई गई••? क्या सरकारी कार्यालय (रजिस्ट्रार ऑफिस) में हुई रजिस्ट्री के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर पुलिस अपनी विफलता को स्वीकार करेगी••?

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