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करैरा वन विभग कि इन 6 बीटो कि निष्पक्ष जांच हुई तो बीट गार्ड से लेकर रेंजर तक हो सकते है सस्पेंड भारी भ्रष्टाचार डिप्टी रेंजर कुलदीप व ब्रजेश राय का कमाल दफ्तर में बैठकर चंद घंटो में तैयार कि फर्जी जांच रिपोर्ट 6 बीटो कि शिकायत में से केवल एक बीट कि जांच उसमे भी फर्जी तरीके से जांच करने के आरोप

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

करैरा वन विभग कि इन 6 बीटो कि निष्पक्ष जांच हुई तो बीट गार्ड से लेकर रेंजर तक हो सकते है सस्पेंड भारी भ्रष्टाचार 

डिप्टी रेंजर कुलदीप व ब्रजेश राय का कमाल दफ्तर में बैठकर चंद घंटो में तैयार कि फर्जी जांच रिपोर्ट

6 बीटो कि शिकायत में से केवल एक बीट कि जांच उसमे भी फर्जी तरीके से जांच करने के आरोप 

DFO सुधांशु यादव, ब्रजेश राय प्रभारी डिप्टी रेंजर 

कार्यालय वन मण्डल अधिकारी शिवपुरी 

शिवपुरी | जिले के करैरा वन परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब कागजों पर ही जंगल बचाए और उजाड़े जा रहे हैं। ताजा मामला अवैध उत्खनन, कटाई और अतिक्रमण की शिकायतों की जांच से जुड़ा है, जहां डिप्टी रेंजर कुलदीप सिंह गौर और विवादित प्रभारी डिप्टी रेंजर ब्रजेश राय की कार्यप्रणाली ने पूरे विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि जिस 6 हजार बीघा क्षेत्र की जांच के लिए हफ़्तों का समय चाहिए था, उसकी रिपोर्ट इन 'महारथियों' ने दफ्तर में बैठकर महज चंद घंटों में तैयार कर दी।

एक ही दिन में प्रभार, उसी दिन जांच और उसी दिन रिपोर्ट... जादू या धोखाधड़ी••? 

मामले की गंभीरता को इसी बात से समझा जा सकता है कि 02 मार्च 2026 को घटनाक्रम किसी फिल्मी पटकथा की तरह चला दोपहर 3 बजे: ब्रजेश राय ने चंदावनी बीट गार्ड के अलावा वैरघाट बीट के डिप्टी का चार्ज वालीराम हरिजन से लिया। शाम करीब 6 बजे सागर जैन ने बीट गार्ड का चार्ज रमेश जाटव से लिया। उसी दिन प्रभारी रेंजर सचेंद्र सिंह तोमर ने जांच के आदेश दिए। उसी रात टीम ने 6 हजार बीघे का पैदल भ्रमण भी कर लिया, 320 खैर के ठूंठ भी गिन लिए, अवैध मुरम के गड्ढों की पैमाइश (382.5 घन मीटर) भी कर ली, ठूठो पर पेंट भी कर दिया और रात होने से पहले रिपोर्ट भी सौंप दी।“सवाल यह है कि क्या वन विभाग के पास कोई 'जादुई शक्ति' है या अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में हजारों पेड़ों की गिनती की गई?

जांच रिपोर्ट में 'लोकेशन' का झोल: 1068 में बताया गड्ढा, जो 1070 में है

जांच दल की फर्जीवाड़े की पोल उनके अपने पंचनामे ने खोल दी है। रिपोर्ट में जिस कक्ष क्रमांक 1068 में अवैध मुरम उत्खनन का बड़ा गड्ढा बताया गया है, धरातल पर वह वहां है ही नहीं। वह गड्ढा कक्ष क्रमांक 1070 में स्थित है। इसके अलावा, पूरी रिपोर्ट में केवल 'खैर' के पेड़ों की कटाई का जिक्र है। क्या जंगल में सिर्फ खैर के ही पेड़ थे जिन्हें चोरों ने चुना? यह तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की साफ कोशिश नजर आती है।

दागी ब्रजेश राय पर मेहरबानी क्यों••? 

ब्रजेश राय, जिसकी खुद की मूल बीट (चंदावनी) में अवैध रेत उत्खनन, पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण की खबरें आम हैं, उसे सजा के बजाय 'पुरस्कार' स्वरूप वैरघाट का प्रभार दिया गया। हाल ही में 24 अप्रैल को चंदावनी बीट में 70 बीघा जंगल आग की भेंट चढ़ गया, लेकिन साहब मौके पर नहीं पहुंचे। अन्य गार्डों ने जैसे-तैसे आग बुझाई। ऐसे लापरवाह और दागी कर्मचारी को अहम जांच सौंपना वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

जिम्मेदारों के गोल-मोल जवाब

कुलदीप सिंह गौर (डिप्टी रेंजर): "मैं तो सिर्फ साथ गया था, जांच बीट गार्ड सागर ने की है। हम बिना खाना खाए गए थे।" (हैरानी की बात है कि सीनियर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं)। “ब्रजेश राय (प्रभारी डिप्टी): "मुझे याद नहीं कि जांच में क्या लिखा है, देखकर बताऊंगा।" (जिस रिपोर्ट पर साइन किए, उसका मजमून ही पता नहीं)। वालीराम हरिजन (पूर्व डिप्टी रेंजर): "2 मार्च को 3 बजे मैंने चार्ज दिया और उसी दिन जांच पूरी हो गई, यह संभव ही नहीं है। यह मुझे फंसाने की साजिश है।"

DFO से निष्पक्ष जांच की मांग

करैरा की चंदावनी, वैरघाट, वीरा, वपावली, कुमरउहा और खोड़ बीट में वन संपदा की जिस तरह से लूट मची है, उसने विभाग की साख को मिट्टी में मिला दिया है। केवल वैरघाट की 'खानापूर्ति' वाली जांच से भ्रष्टाचार नहीं थमेगा। डीएफओ (DFO) सुधांशु यादव इस पूरे मामले का संज्ञान लें। यदि किसी निष्पक्ष स्वतंत्र दल से दोबारा जांच कराई जाए, तो न केवल कुलदीप सिंह गौर और ब्रजेश राय का फर्जीवाड़ा उजागर होगा, बल्कि वन विभाग का एक बड़ा घोटाला भी सामने आएगा।

मुख्य बिंदु जिन पर उठ रहे सवाल••?

6 हजार बीघे के दुर्गम क्षेत्र की जांच चंद घंटों में कैसे संभव हुई••? ज़ब मौके पर जाकर क्षेत्र में जांच कि गई तो कक्ष क्रमांक गलत कैसे डाला ••? नवनियुक्त गार्ड ने बिना क्षेत्र को समझे कुछ ही घंटों में ठूंठों पर पेंट कैसे कर दिया•••? दागी कर्मचारियों को ही जांच दल में क्यों रखा गया••?

इनका कहना है। 

मुझे बीट में तीन चार महिने ही हुए थे मेरी ब्रजेश राय ने झूठी शिकायत कि थी जिस पर जांच हुई जांच में जो पहले से पेड़ कटे हुए थे उनको लेकर पहले कौशल को और अब मुझे सस्पेंड कर दिया है 2 मार्च को करीब 3 बजे मैंने ब्रजेश राय को चार्ज दिया 2 मार्च को ही जांच का आदेश आया और जांच हुई 2 मार्च को ही पंचनामा बनाकर इन्होंने बरिष्ठ प्रभारी रेंजर सचेद्र को जांच सौंप दी एक ही दिन में सारे काम कैसे हुए है समझ नहीं आया जांच भी संभव नहीं है। 

वालीराम हरिजन पूर्व डिप्टी रेंजर वैरघाट बीट 

इनका कहना है। 

पहले उड़नदस्ता जांच करने पहुंची थी उसने 243 पेड़ कटे पाए इसके बाद उस जांच को देखने और आरोपियों का पता लगाने मुझे भेजा था मैंने जांच कर बरिष्ठ अधिकारियो को दी लेकिन उसके बाद द्वारा से जांच दल कुलदीप गौर के नेतृत्व मैं बनाया गया जिसमे सागर ने पीआर काटी है। 

सोमेश शर्मा डिप्टी रेंजर घसारई करैरा 

इनका कहना है। 

जांच अधिकारी तो कुलदीप सिंह गौर ही थे दो स्टार जांच करने का आदेश कब आया है और जांच में क्या क्या लिखा है यह तो में देखकर ही बता पाउँगा ऐसे मुझे कुछ याद नहीं है। 

ब्रजेश राय प्रभारी डिप्टी रेंजर वैरघाट बीट 

इनका कहना है। 

जांच तो बीट गार्ड सागर शर्मा ने कि है मैं तो सिर्फ उसके साथ गया था अब उसने कैसे जांच कि है यह वही जाने हम सुबह से ही जांच करने गए थे उसी दिन जांच का आदेश मिला था। 

कुलदीप सिंह गौर करैरा डिप्टी रेंजर 


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