शिवपुरी में 'मलाईदार' कुर्सियों पर दशकों से जमे साहब, तबादला नीति को ठेंगा, भ्रष्टाचार की जड़ें गहरीं
RES से लेकर PMGSY तक, रसूख के दम पर नियम दरकिनार; क्या जिम्मेदारो की खामोशी घोटालों को दे रही है संरक्षण••?
![]() |
| जिला मुख्यालय शिवपुरी |
शिवपुरी। मध्य प्रदेश शासन की जीरो टॉलरेंस और पारदर्शी तबादला नीति शिवपुरी जिले की सरहदों पर आकर दम तोड़ती नजर आ रही है। जिले के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबी फेहरिस्त है, जो पिछले कई दशकों से एक ही टेबल और एक ही कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठे हैं। सरकारी सेवा में नियमानुसार होने वाले फेरबदल को रसूख और सांठगांठ के दम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है, जिससे विभागों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का जाल मकड़ी की तरह फैल चुका है। एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहने के कारण अधिकारियों और बिचौलियों के बीच एक अटूट 'सिंडिकेट' बन गया है। जब चेहरा नहीं बदलता, तो भ्रष्टाचार के तरीके भी संस्थागत हो जाते हैं। आम जनता का आरोप है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में होने वाली अनियमितताओं की मुख्य वजह यही 'स्थिरता' है। शासन की गाइडलाइन स्पष्ट कहती है कि संवेदनशील पदों पर तीन साल से अधिक कोई नहीं रहना चाहिए, लेकिन शिवपुरी में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है।
बॉक्स
इन विभागों में 'जंग' खा रही है तबादला फाइल
जिले के प्रमुख विभागों की स्थिति पर नजर डालें तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं, RES (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) एवं PWD निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठते सवालों के बीच यहाँ तकनीकी अमला वर्षों से जमा हुआ है।महिला बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग: योजनाओं के क्रियान्वयन से ज्यादा बजट ठिकाने लगाने के आरोप लगते रहे हैं।आबकारी एवं खनिज विभाग: राजस्व से जुड़े इन मलाईदार विभागों में 'सेटिंग' का खेल दशकों पुराने चेहरों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।शिक्षा, जिला पंचायत और PHE: यहाँ भी स्थिति अलग नहीं है; पदस्थापना के नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारी अपनी जड़ें जमा चुके हैं।कोषालय और रजिस्ट्री विभाग: संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक जमे रहना सीधे तौर पर वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका को जन्म दे रहा है।
बॉक्स
कलेक्टर की चुप्पी पर उठते सवाल
जिले के मुखिया होने के नाते यह कलेक्टर की जिम्मेदारी है कि वे शासन की स्थानांतरण नीति का सख्ती से पालन कराएं। लेकिन, बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्यवाही न होना प्रशासन की मंशा पर गहरे सवालिया निशान खड़े करता है। क्या जिला प्रशासन इन 'प्रभावशाली' कर्मचारियों के रसूख के आगे बेबस है? या फिर इन अनियमितताओं को उच्च स्तर पर मौन संरक्षण प्राप्त है•••?
बॉक्स
जनता की मांग: निष्पक्ष जांच और सर्जरी
शिवपुरी की जागरूक जनता अब आर-पार के मूड में है। मांग उठ रही है कि दशकों से जमे इन 'नवाबों' की सूची तैयार कर उनका तत्काल प्रभाव से जिले के बाहर तबादला किया जाए और उनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
प्रशासन से कुछ सवाल भी है जिनका जबाव प्रशासन को देना चाहिए “क्या शिवपुरी जिले में मध्य प्रदेश शासन की ट्रांसफर गाइडलाइन लागू नहीं होती•••? ”एक ही विभाग में 10-20 साल से जमे कर्मचारियों पर अब तक गाज क्यों नहीं गिरी•••? “क्या प्रशासन को यह नहीं दिखता कि लंबे समय की पदस्थापना भ्रष्टाचार का मुख्य कारण बन रही है••? किसी का कारण है कि जिला मुख्यालय पर संचालित होने वाली अधिकतर विभागों में करोड़ों रूपये के घोटाले हो चुके हैं•••?

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें