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कानून का मज़ाक: हाईकोर्ट ने ठुकराई जमानत, तो अस्पताल ने खोल दिए 'वीआईपी' इलाज के रास्ते जमीन के जादूगरों का नया कारनामा: बाप फरार, बेटा 'बीमार' और पुलिस-डॉक्टर बने मददगार!"

सोमवार, 2 मार्च 2026

कानून का मज़ाक: हाईकोर्ट ने ठुकराई जमानत, तो अस्पताल ने खोल दिए 'वीआईपी' इलाज के रास्ते

जमीन के जादूगरों का नया कारनामा: बाप फरार, बेटा 'बीमार' और पुलिस-डॉक्टर बने मददगार!"


नरेंद्र जैन भोला बेटा हर्षित जैन 

शिवपुरी। शिवपुरी के न्याय जगत और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसा 'सर्कस' चल रहा है, जिसे देख कानून की देवी भी अपनी आंखों की पट्टी खोलने को मजबूर हो जाए। जमीन की जालसाजी का आरोपी हर्षित जैन जेल की सलाखों के पीछे होने के बजाय सरकारी अस्पतालों के वातानुकूलित (AC) कमरों और एम्बुलेंस की सवारी का लुत्फ उठा रहा है।यह खबर केवल एक आरोपी के फरार होने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस ‘नापाक साठगांठ’ की, जिसमें डॉक्टर, पुलिस और सफेदपोश नेता मिलकर एक अपराधी को कानून की जेल से बचा रहे हैं।

जालसाजी की जड़ें: सत्ता का नशा और फर्जी शपथ पत्र

मामला कमला हेरिटेज के मालिक नरेंद्र जैन (भोला) और प्रद्युम्न वर्मा के बीच एक प्लॉट के विवाद से शुरू हुआ। रसूख के नशे में चूर भोला ने पहले भाजपा का 'पट्टा' पहनकर प्रद्युम्न पर केस दर्ज कराया, लेकिन जैसे ही प्रद्युम्न भाजपा में आए, पासा पलट गया। जांच में खुलासा हुआ कि भोला ने अपने बेटे हर्षित जैन का फर्जी शपथ पत्र बनवाकर कोर्ट को गुमराह किया था।जब पाप का घड़ा भरा, तो शिवपुरी सत्र न्यायालय से लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट तक ने नरेंद्र भोला, हर्षित और उनके नौकर महेश शर्मा की जमानत याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दीं कि इन्होंने न्याय प्रक्रिया के साथ 'मजाक' किया है।

सरेंडर के बाद शुरू हुआ ‘अस्पताल-अस्पताल’ का खेल

जब कानून की घेराबंदी सख्त हुई, तो हर्षित जैन ने 25 फरवरी को सरेंडर किया। लेकिन असली ड्रामा यहीं से शुरू हुआ। जेल की रोटी किसे हजम होती है••? लिहाजा, रातों-रात आरोपी 'गंभीर बीमार' हो गया।सिविल सर्जन डॉ. बचनलाल यादव से जब पूछा गया कि आरोपी को क्या बीमारी है, तो उनके पास 'सन्नाटे' के सिवा कोई जवाब नहीं था। आनन-फानन में उसे मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। मेडिकल कॉलेज में 'व्यक्तिगत अनबन' का बहाना बनाकर उसे तत्काल ग्वालियर रेफर कर दिया गया। सवाल यह है कि क्या अस्पताल अब आरोपियों की सुविधा के हिसाब से रेफरल टिकट काटेंगे••? 

वायरल वीडियो: सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा

जिस हर्षित जैन को गंभीर हालत बताकर ग्वालियर रेफर किया गया, उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर बम की तरह फटा है। वीडियो में 'बीमार' हर्षित बिना किसी सहारे के शान से पैदल चल रहा है।पुलिसकर्मियों के साथ ठहाके लगाकर गप्पें लड़ा रहा है। उसके चेहरे पर न बीमारी का खौफ है, न कानून का डर।“क्या यह वीडियो उन डॉक्टरों के लिए शर्म का विषय नहीं है जिन्होंने उसे 'गंभीर' बताकर रेफर किया••? क्या यह पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर थू-थू नहीं है••?

सिस्टम से सीधे और कड़वे सवाल

स्वास्थ्य विभाग से “क्या जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अब अपराधियों के लिए 'सेफ हाउस' बन गए हैं••? आम आदमी स्ट्रेचर के लिए तरस जाता है, और आरोपी के लिए एम्बुलेंस और रेफरल लेटर मिनटों में तैयार हो जाता है••? पुलिस कप्तान से: वीडियो में आरोपी के साथ 'यारी' निभा रहे पुलिसकर्मियों पर अब तक सस्पेंशन की गाज क्यों नहीं गिरी••? क्या पुलिस अब आरोपियों की बॉडीगार्ड बन गई है••? “न्यायालय से गुहार: जब हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर दी, तो क्या अस्पताल के जरिए 'छद्म जमानत' (Proxy Bail) भोग रहे इन आरोपियों पर अवमानना का केस नहीं चलना चाहिए•••? 

फरार बाप और ‘बीमार’ बेटा

मुख्य आरोपी नरेंद्र जैन (भोला) अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर (फरार) है, और बेटा अस्पताल की आड़ में कानून को ठेंगा दिखा रहा है। शिवपुरी की जनता देख रही है कि कैसे चंद रुपयों और रसूख के दम पर इंसाफ का गला घोंटा जा रहा है। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो 'कानून का राज' महज किताबों की बातें बनकर रह जाएगा।

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