शिवपुरी में ‘आजीविका होली मेला’: फल-सब्जियों के रंगों से महकी होली, महिलाओं ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिशाल
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| आजीविका मिशन शिवपुरी |
शिवपुरी। रंगों का पावन त्योहार होली अब केवल आपसी सौहार्द और उमंग का ही पर्व नहीं रहा, बल्कि यह शिवपुरी में महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MPRLM) के तत्वावधान में जिला मुख्यालय पर आयोजित दो दिवसीय 'आजीविका होली मेला' स्थानीय निवासियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
एसडीएम कार्यालय परिसर में सजी आजीविका की दुकान
शहर के मध्य स्थित एसडीएम कार्यालय (न्यायालय परिसर के सामने) के आजीविका भवन में इन स्टॉल्स को सजाया गया है। यहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से आईं स्व-सहायता समूह की जांबाज महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार किए गए हर्बल गुलाल और प्राकृतिक रंगों को प्रदर्शन और बिक्री के लिए रखा है। यह मेला न केवल शुद्धता की गारंटी दे रहा है, बल्कि 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को भी जमीन पर उतार रहा है।
खेतों की हरियाली और फलों की लाली से बने रंग
बाजार में मिलने वाले घातक केमिकल युक्त रंगों के विकल्प के रूप में, इन महिलाओं ने प्रकृति की गोद से रंग निकाले हैं। इन रंगों की विशेषताएँ कुछ इस प्रकार हैं चुकंदर से लाल: गहरे लाल और गुलाबी रंग के लिए चुकंदर का अर्क इस्तेमाल किया गया है।पालक से हरा: ताजगी भरा हरा रंग पालक और हरी पत्तियों से तैयार है। हल्दी से पीला: औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का उपयोग कर सुरक्षित पीला रंग बनाया गया है।पलाश (टेसू) से केसरिया: बुंदेलखंड और ग्वालियर संभाग की पहचान 'पलाश' के फूलों से पारंपरिक केसरिया रंग तैयार किया गया है।
ये रंग पूरी तरह केमिकल-मुक्त हैं, जिससे त्वचा पर एलर्जी या आंखों में जलन का कोई खतरा नहीं है। साथ ही, इनमें शामिल प्राकृतिक सुगंध होली के आनंद को दोगुना कर देती है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
इस पहल ने जिले की सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता का रंग भर दिया है। पारंपरिक सिंथेटिक रंगों की तुलना में इन हर्बल रंगों की मांग इतनी अधिक है कि ग्राहक इन्हें हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि यह उनके लिए केवल व्यापार नहीं, बल्कि अपनी कला और मेहनत को पहचान दिलाने का मंच है।
सिर्फ रंग ही नहीं, और भी है खास
मेले में केवल रंगों की ही धूम नहीं है, बल्कि स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित अन्य उत्पाद भी उपलब्ध हैं शुद्ध खाद्य पदार्थ: घर के बने पापड़, चिप्स और पारंपरिक होली के व्यंजन।हस्तशिल्प: सजावटी सामान और हस्तनिर्मित वस्तुएं। सेल्फी पॉइंट: प्रशासन द्वारा मेले में आकर्षक 'सेल्फी पॉइंट' भी बनाए गए हैं, जहाँ युवा पीढ़ी बढ़-चढ़कर अपनी तस्वीरें साझा कर रही है और इस पहल का प्रचार कर रही है।
प्रशासनिक सहयोग और विजन
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराना और आम जनता को सुरक्षित होली खेलने के लिए प्रेरित करना है। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है, बल्कि शहरवासियों को भी मिलावट मुक्त उत्पाद प्राप्त हो रहे हैं।

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