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बिजली विभाग का कारनामा : पहले जबरन किसान के निजी खेत में रखी डीपी : फिर गलती मानकर हटाने लाइनमैन ने किसान से मांगी रिश्वत अंधेरगर्दी: अमोला में किसान के सीने पर 'बिजली' का सितम, खेत के बीचों-बीच जबरन गाड़ दी मौत की डीपी

रविवार, 15 मार्च 2026

बिजली विभाग का कारनामा : पहले जबरन किसान के निजी खेत में रखी डीपी : फिर गलती मानकर हटाने लाइनमैन ने किसान से मांगी रिश्वत 

अंधेरगर्दी: अमोला में किसान के सीने पर 'बिजली' का सितम, खेत के बीचों-बीच जबरन गाड़ दी मौत की डीपी

DP खसरा 

शिवपुरी (करैरा) | प्रदेश सरकार एक ओर 'किसान हितैषी' होने का दंभ भरती है, वहीं दूसरी ओर शिवपुरी जिले के करैरा तहसील अंतर्गत ग्राम अमोला क्रेशर में बिजली विभाग के कारिंदों ने जुल्म की इंतिहा कर दी है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर किसान किसन लाल पाल (पुत्र भावसिंह पाल) के निजी मालिकाना हक वाले सर्वे नंबर 1444/4 के ठीक बीचों-बीच जबरन बिजली का ट्रांसफार्मर (DP) खड़ा कर दिया है। किसान का आरोप है कि विरोध करने पर उसे डराया-धमकाया गया और अब उस गलती को सुधारने के लिए उससे मोटी रकम की मांग की जा रही है।

खेत बना 'मौत का टापू', खेती करना हुआ मुहाल

किसान किसन लाल ने बताया कि विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के उनके उपजाऊ खेत के बीच में भारी भरकम डीपी और खंभे गाड़ दिए हैं। इससे न केवल उनकी बेशकीमती जमीन खराब हो रही है, बल्कि ट्रैक्टर से जुताई और बोनी करना भी नामुमकिन हो गया है। सबसे बड़ी चिंता शॉर्ट सर्किट से फसल में आग लगने की है। गर्मी के मौसम में सूखी फसल के ऊपर झूलते हाई वोल्टेज तार किसी भी वक्त पूरे खेत को राख के ढेर में तब्दील कर सकते हैं।

लाइनमैन गजेंद्र यादव और ठेकेदार पर 'रिश्वतखोरी' का आरोप

पीड़ित किसान जब अपनी फरियाद लेकर संबंधित लाइनमैन गजेंद्र यादव और ठेकेदार देवेंद्र यादव के पास पहुँचा, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय किसान के जख्मों पर नमक छिड़क दिया। किसान का आरोप है कि डीपी हटाने के बदले उससे पैसों (रिश्वत) की मांग की गई है। किसान ने सवाल उठाया है कि— "जब डीपी मेरी अनुमति के बिना और अवैध रूप से मेरे निजी खेत में रखी गई, तो उसे हटाने के लिए मैं विभाग को पैसे क्यों दूँ? क्या विभाग अब डकैती और वसूली का जरिया बन गया है?"

जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवालिया निशान

इस पूरे मामले में बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है।“क्या किसी की निजी भूमि पर बिना अधिग्रहण या सहमति के सरकारी ढांचा खड़ा करना कानूनन अपराध नहीं है••? “क्या लाइनमैन और ठेकेदार अपनी मर्जी से कहीं भी डीपी रखने और वसूली करने के लिए स्वतंत्र हैं••? ”यदि कल को करंट लगने या आग लगने से कोई जनहानि होती है, तो क्या विभाग इसकी जिम्मेदारी लेगा••? 

अमोला के ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। किसान किसन लाल पाल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके निजी खेत से डीपी को नहीं हटाया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने और कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।

आपने कहा 

मेरा काम सर्वे करने का है डीपी लगाने का नहीं है सर्वे गलत हुआ है मैंने अपने बरिष्ठ अधिकारियो को बता दिया है मेरी किसान से भी बात हुई है एक दो दिन में वहा से हटाकर उसे और कही लगवा देंगे। 

गजेंद्र यादव लाइनमैन 

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