बड़ी खबर करैरा में 21 बोरो में 49 हजार गड्डिया जब्त
करैरा में वन विभाग का महाघोटाला उजागर: डिप्टी रेंजर पर मेहरबानी, अफसरों ने साधी चुप्पी, मीडिया के फोन से बनाई दूरी
जीपीएस तस्वीरों ने खोली पोल: डिप्टी रेंजर ब्रजेश राय के संरक्षण में बिक रहा था सरकारी तेंदूपत्ता, आग में जंगल झोंकने वाले दागी को निलंबन के बजाय 'इनाम' क्यों••?
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| हिन्दी खबर मध्य प्रदेश |
शिवपुरी/करैरा।करैरा वन परिक्षेत्र की खोड़ (अ) सब रेंज के अंतर्गत आने वाली बीरा बीट इन दिनों वन विभाग के कथित भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा गढ़ बन चुकी है। यहाँ तैनात नोडल अधिकारी व डिप्टी रेंजर ब्रजेश राय पर ग्रामीणों के साथ मिलकर अवैध तेंदूपत्ता का फड़ संचालित करने और सरकारी संपदा को औने-पौने दामों में ठिकाने लगाने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, भनक लगते ही एसडीओ (SDO) ने मौके पर दबिश देकर करीब 49 हजार अवैध तेंदूपत्ता की गड्डियां जब्त तो कर लीं, लेकिन जैसे ही इस काले कारोबार के मुख्य सूत्रधार के रूप में विभाग के ही डिप्टी रेंजर का नाम सामने आया, वैसे ही पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने और रफा-दफा करने का खेल शुरू हो गया है। हैरानी की बात यह है कि करीब 24 हजार गड्डियां कार्रवाई से पहले ही बाजार में बेची जा चुकी हैं, जो विभाग की मुस्तैदी की पोल खोलता है।
जीपीएस लोकेशन वाली तस्वीरों ने खोली पोल
बैकडोर से संचालित हो रहे इस पूरे अवैध फड़ का सच जीपीएस लोकेशन वाली तस्वीरों ने चीख-चीखकर बयां कर दिया है। मौके पर 21 बोरा तेंदूपत्ता और खुले खेत में बिखरी हजारों गड्डियां साफ नजर आ रही हैं, आरोप है कि इसे डिप्टी रेंजर ब्रजेश राय स्थानीय निवासी हरी लोधी के माध्यम से संचालित करवा रहा था। इस महाघोटाले पर जब हमने जिले के जिम्मेदार डीएफओ से लेकर एसडीओ तक से जवाब मांगना चाहा, तो साहबों ने दो दिनों तक फोन रिसीव करना तक मुनासिब नहीं समझा। अफसरों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी' खुद उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है कि आखिर सच का सामना करने से पैर क्यों कांप रहे हैं? वहीं बीरा वन उपज समिति के प्रबंधक अमर सिंह परिहार का यह कहना कि 'उन्हें कार्रवाई से दूर रखा गया', इस दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली होने का इशारा करता है।
दागी पर मेहरबानी क्यों? लापरवाहों को सजा के बजाय मिल रहा 'पुरस्कार'
विवादों से पुराना नाता रखने वाले डिप्टी रेंजर ब्रजेश राय पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का यह कोई पहला आरोप नहीं है। इसके पहले भी अपनी मूल बीट (चंदावनी) में अवैध रेत उत्खनन, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और वन भूमि पर अतिक्रमण को संरक्षण देने की शिकायतें आला अधिकारियों तक पहुँचती रही हैं। अभी हाल ही में 24 अप्रैल को चंदावनी बीट में लगभग 70 बीघा जंगल भीषण आग की भेंट चढ़ गया, लेकिन 'साहब' मौके पर झांकने तक नहीं गए। कायदे से जिस लापरवाह कर्मचारी पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसे सजा देने के बजाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने 'पुरस्कार' स्वरूप डिप्टी बनाकर वैरघाट जैसी महत्वपूर्ण बीट का प्रभार सौंप दिया। हर बार ठोस कदम उठाने के बजाय दागी कर्मचारी को अभयदान देना वन विभाग की विश्वसनीयता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करता है।
रसूखदारों की फाइलों में दफन होगा घोटाला या होगा निलंबन?
इतने सारे पुख्ता सबूतों, जीपीएस तस्वीरों और पूर्व के काले कारनामों के बाद भी वन विभाग के उच्च अधिकारी आखिर किस रसूखदार के दबाव में इस भ्रष्ट और लापरवाह कर्मचारी को बचा रहे हैं? कायदे से ऐसे दागी नोडल अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच बैठानी चाहिए थी, लेकिन यहाँ तो अधिकारी खुद मीडिया के फोन से दूरी बनाकर कहानी गढ़ने में जुटे हैं। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद भोपाल में बैठे उच्च अधिकारी इस गंभीर भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेकर कोई कड़ी कार्रवाई करते हैं, या फिर करैरा वन परिक्षेत्र का यह 'तेंदूपत्ता घोटाला' भी हमेशा की तरह रसूखदारों की फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।
इनका कहना है।
वन उपज समिति के बीरा और खैरोना गांव का शासन ने ऊपर से ही नोटिफिकेशन जारी कर फड बंद कर दिया था जबकि आठ फड अभी वर्तमान में चालू है जिनमें नैगवा वपावली बमेरा मऊकुड़िछा केनवाया कुमरउआ मानकपुर यह फड चालू है तेंदुपत्ता पकड़ा है या नहीं इसकी मुझे जानकारी नहीं है कार्यवाही कि प्रक्रिया तो हुई है DFO और SDO सहाब दोनों आए थे मुझे कार्यवाही से दूर रखा है इसलिए क्या कार्यवाही हुई है मुझे पता नहीं है।
अमर सिंह परिहार बीरा वन उपज समिति प्रबंधक प्रभारी

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