7 करोड़ के गबन में 'नामजद हुए पर 'जांच से बच निकले ये रसूखदार...? सालों से एक ही टेबल पर कब्जा / यदि इस 7 करोड़ के घोटाले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय पुन: जांच (री इनवेस्टीगेशन) होती है, तो कई सफेदपोशों का जेल जाना तय है।
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| लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) संभाग शिवपुरी |
शिवपुरी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) संभाग शिवपुरी में मार्च 2025 में हुए 7 करोड़ के वेतन घोटाले ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। लेकिन इस घोटाले की सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि विभाग के कुछ 'खास कर्मचारियों ने कथित तौर पर अपने रसूख और सेटिंग के दम पर एफआईआर और जांच की आंच से खुद को बाहर सुरक्षित कर लिया। इसमें मुख्य रूप से जय प्रकाश वर्मा (सहायक ग्रेड-3) और श्रीमती मिथलेश शर्मा (सहायक ग्रेड-3) के नाम चर्चा के केंद्र में हैं। 7 करोड़ की वह राशि उन गरीब गैंगमेन की थी जो धूप और बारिश में सड़कों पर काम करते हैं। उनके वेतन को फर्जी खातों में डालकर बंदरबांट करने वाले असली सूत्रधार आज भी उसी कार्यालय में मलाईदार कुर्सियों पर बैठे हैं। सूत्रों और विभागीय चर्चाओं के अनुसार, जब गैंगमेन के वेतन को अन्य खातों में ट्रांसफर करने का खेल पकड़ा गया था, तब शुरुआती जांच और साक्ष्यों में जय प्रकाश वर्मा और मिथलेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध मानी गई थी। आरोप थे कि बिना बाबू स्तर की मिलीभगत के इतना बड़ा फंड ट्रांसफर संभव नहीं था। लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से जब अंतिम कार्रवाई और नामजद एफआईआर की बारी आई, तो इन रसूखदारों के नाम फाइलों से गायब हो गए या उन्हें 'तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया।
33 साल से एक ही विभाग में जमा है जय प्रकाश वर्मा का 'साम्राज्य
प्रकाश वर्मा 09.09.1992 से यानी पिछले 33 सालों से शिवपुरी में ही डटे हुए हैं। वहीं श्रीमती मिथलेश शर्मा भी 01.05.2001 से लगभग 24 सालों से इसी कार्यालय में पदस्थ हैं। सवाल: क्या एक ही स्थान पर तीन दशकों तक जमे रहने के कारण इनका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि जांच एजेंसियां भी इन पर हाथ डालने से कतरा रही हैं...? संदेह है कि क्या घोटाले की मुख्य साजिश इन्हीं 'अनुभवी बाबुओं के दिमाग की उपज थी, जिन्होंने नए और निचले कर्मचारियों को मोहरा बनाकर खुद को बचा लिया...?
जांच पर उठते गंभीर सवाल:
1. घोटाले के वक्त जिन कर्मचारियों के नाम मुख्य रूप से सामने आए थे, उन्हें जांच के दायरे से बाहर रखने के पीछे किसका हाथ है...?
2. क्या विभाग के उच्च अधिकारी इन 'पुराने बाबुओं को संरक्षण दे रहे हैं...?
3. क्या जय प्रकाश वर्मा और मिथलेश शर्मा के बैंकिंग लेन-देन और संपत्ति की सूक्ष्म जांच की जाएगी...?
पीडब्ल्यूडी विभाग शिवपुरी में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि यहाँ सालों से जमे कर्मचारी अब खुद को नियम-कायदों से ऊपर समझने लगे हैं। यदि इस 7 करोड़ के घोटाले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय पुन: जांच (री इनवेस्टीगेशन) होती है, तो कई सफेदपोशों का जेल जाना तय है।

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