पीडब्ल्यूडी का जादुई बाबू: संविदा से शुरू किया सफर, भ्रष्टाचार की सीढ़ियों से पहुंचा करोड़ों के महल तक!
पीडब्ल्यूडी के 7.50 करोड़ के घोटाले की री-इन्वेस्टीगेशन में जेल जा सकता है विभाग का बाबू
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| photo shoot mohan vikat |
7 करोड़ का वेतन घोटाला: बड़े-बड़े नपे, फिर 'साहब कैसे बचे?
विगत मार्च 2025 में पीडब्ल्यूडी में 7 करोड़ 15 लाख रुपये का बहुचर्चित वेतन घोटाला उजागर हुआ था। इस मामले में 5 कार्यपालन यंत्रियों (ईई) सहित 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई थी।
हैरानी की बात तो तब सामने आई जब इस घोटाले के समय जेपी वर्मा विभाग के महत्वपूर्ण पटल पर थे। लेकिन फिर भी वह घोटाले की आंच से बच निकले। बताया जाता है कि उन्होंने एक पूर्व राज्य मंत्री से अपनी नजदीकी का फायदा उठाकर और 'आर्थिक प्रबंधन के जरिए अपना नाम जांच की आंच से दूर करवा लिया। यदि उनकी संपत्ति की जांच होती है, तो इस घोटाले की कई नई परतें खुलना तय हैं।
33 साल से एक ही कुर्सी पर 'कब्जा
प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल भी कौंध रहा है कि जेपी वर्मा 9 सितंबर 1992 से यानी पिछले 33 वर्षों से एक ही स्थान पर कैसे जमे हुए हैं? नियमों को ताक पर रखकर एक ही जिले में तीन दशकों तक जमे रहना उनके रसूख और भ्रष्टाचार के नेटवर्क को पुख्ता करता है। इसके चलते सिस्टम की साख पर भी सवाल सुलगते है। कलेक्टर की चुप्पी: क्या जिला कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी इस 'करोड़पति बाबू की आय और संपत्ति की जांच के आदेश देंगे...? एक बाबू का वेतन कितना भी बढ़ जाए, क्या वह अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाने और लाखों का मासिक खर्च उठाने में सक्षम हो सकता है..? चर्चा है कि वर्मा अब शहर की किसी प्राइम लोकेशन पर लाखों का नया प्लॉट खरीदने की फिराक में हैं। आम जनता के टैक्स के पैसे से अपनी तिजोरियाँ भरने वाले ऐसे कर्मचारी पूरे सिस्टम को कलंकित कर रहे हैं। अब देखना यह है कि शिवपुरी प्रशासन इस 'भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार करता है या फिर यह बाबू एक बार फिर अपनी पहुंच के दम पर कानून को ठेंगा दिखा देगा।

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