क्या केंद्रीय मंत्री सिंधिया के भूमाफीयाओ पर कार्यवाही के निर्देश के बाद “करैरा में पहाड़ खोदने वाले BJP के मंडल अध्यक्ष व उसके भाईओ पर FIR दर्ज कर जुर्माना वसूलने की कार्यवाही करेगा प्रशासन•••?
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| BJP मंडल अध्यक्ष व खुदा हुआ पहाड़ |
शिवपुरी / करैरा “ यह एक बहुत ही गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला बना हुआ है, ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब करैरा का यह मामला 'कथनी और करनी' की परीक्षा बन गया है।
1. प्रशासनिक मजबूरी बनाम राजनीतिक दबाव
सिंधिया जी ने 'दिशा' (DISHA) की बैठक में जो निर्देश दिए, वे On-Record हैं। ऐसे में यदि प्रशासन इन भाजपा नेताओं (मंडल अध्यक्ष और उनके भाइयों) पर कार्यवाही नहीं करता है, तो यह सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री के आदेशों की अवहेलना मानी जाएगी। प्रशासन के लिए अब इस मामले को दबाना मुश्किल होगा क्योंकि 54.58 करोड़ रुपये का जुर्माना एक बहुत बड़ी सरकारी राशि है।
2 FIR और वसूली की प्रक्रिया
• मामले में अवैध उत्खनन की पुष्टि हो चुकी है और सर्वे रिपोर्ट में पहाड़ को नुकसान पहुँचाने के प्रमाण भी हैं, तो खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन FIR दर्ज करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।लेकिन अभी तक FIR के लिए पात्राचार नहीं किया गया है।
• जुर्माना वसूली: ₹54.58 करोड़ की वसूली के लिए प्रशासन 'आरआरसी' (Revenue Recovery Certificate) जारी कर सकता है। यदि आरोपी इसे जमा नहीं करते, तो उनकी संपत्तियों की कुर्की तक की जा सकती है।
3. सिंधिया जी की साख का सवाल
सिंधिया जी अपनी "बेदाग" और "कड़क" कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। यदि उनके निर्देश के बावजूद उनके ही क्षेत्र (शिवपुरी-करैरा) में उनकी ही पार्टी के नेताओं पर कार्यवाही नहीं होती, तो विपक्ष को उन पर हमला करने का बड़ा मौका मिल जाएगा। इसलिए, संभावना है कि शासन स्तर पर इस मामले में 'नजीर पेश करने वाली' कार्यवाही का दबाव बनाया जाए।
4. संभावित चुनौतियाँ
अक्सर ऐसे मामलों में देखा गया है कि:
• आरोपी नेता स्टे (Stay) लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं।
• प्रशासनिक अधिकारी जांच की फाइल को 'तकनीकी खामियों' के नाम पर लंबा खींच देते हैं।
निष्कर्ष:
कार्यवाही होगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कलेक्टर और एसपी को ऊपर से कितनी 'फ्री हैंड' दी गई है। यदि सिंधिया जी अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो प्रशासन को कार्यवाही करनी ही पड़ेगी, वरना यह मान लिया जाएगा कि आदेश केवल जनता को दिखाने के लिए थे।

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