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शिवपुरी नगर पालिका: सरकार का नोटिस या भ्रष्टाचार का डेथ वारंट•••?

गुरुवार, 15 जनवरी 2026

शिवपुरी नगर पालिका: सरकार का नोटिस या भ्रष्टाचार का डेथ वारंट•••? 

गायत्री शर्मा 

1. नोटिस की धमक और हिलती कुर्सी

शिवपुरी की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब राज्य शासन ने नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को एक विस्तृत 'कारण बताओ' नोटिस थमा दिया। यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक भविष्य पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। क्या यह नोटिस गायत्री शर्मा की विदाई की औपचारिक शुरुआत है••?

2. करोड़ों के घोटाले और वित्तीय कालिख

सरकारी दस्तावेजों में 'वित्तीय अनियमितता' शब्द का इस्तेमाल हुआ है, लेकिन गलियारों में चर्चा करोड़ों के उस कथित घोटाले की है जिसने नगर पालिका के खजाने को खोखला कर दिया। सवाल यह है कि जनता के टैक्स का पैसा विकास कार्यों के बजाय किसकी जेबों और किन फाइलों में दफन हो गया••? 

3. अपनों को 'रेवड़ी' और विपक्ष को 'ठेंगा'

पक्षपात के आरोपों ने अध्यक्ष की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। टेंडर आवंटन से लेकर वार्डों के विकास तक, क्या वाकई कुछ खास चहेतों को ही मलाई खिलाई गई? अगर भेदभाव नहीं था, तो अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने बगावत का झंडा क्यों बुलंद किया?

4. प्रशासनिक दखलंदाजी या निजी जागीर?

नोटिस में 'गैर-जरूरी हस्तक्षेप' का जिक्र सीधे तौर पर अध्यक्ष के करीबियों और परिजनों की ओर इशारा करता है। क्या नगर पालिका का संचालन निर्वाचित प्रतिनिधि के बजाय उनके 'निजी दरबार' से हो रहा था? सरकारी अधिकारियों के कामकाज में दखल देने का अधिकार आखिर उन्हें किसने दिया?

5. अक्षमता की मुहर और बदहाल शहर

जब राज्य शासन खुद यह कहे कि अध्यक्ष 'दायित्वों के निर्वहन में अक्षम' हैं, तो जनता का क्या होगा? टूटी सड़कें, पानी का संकट और कचरे के ढेर—क्या शिवपुरी की यह दुर्दशा अध्यक्ष की प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत नहीं है?

6. अपनों की बगावत और सिंधिया का मौन

महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) के गढ़ में भाजपा पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा देना और हनुमान मंदिर में कसम खाना इस बात का प्रतीक है कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। क्या शीर्ष नेतृत्व ने अब गायत्री शर्मा से किनारा कर लिया है, या यह केवल दिखावे की सख्ती है?

7. पारिवारिक विवादों का साया

मामला सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है; अध्यक्ष के परिवार से जुड़े हालिया विवादों और गंभीर आरोपों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। क्या इन व्यक्तिगत विवादों ने अध्यक्ष की राजनीतिक और नैतिक शक्ति को कमजोर कर दिया है, जिससे शासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा?

8. 15 दिन की मोहलत और जनता का इंसाफ

प्रशासन ने जवाब के लिए 15 दिन दिए हैं, लेकिन शिवपुरी की जनता के मन में सवाल आज ही खड़ा है। क्या गायत्री शर्मा इन गंभीर आरोपों का संतोषजनक उत्तर दे पाएंगी, या फिर शिवपुरी नगर पालिका को एक नया नेतृत्व मिलने वाला है?

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