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कोलारस में सट्टे की पर्चियों पर लिखी जा रही पुलिस की साख! क्या TI गब्बर सिंह और SDOP मिश्रा के संरक्षण में फल-फूल रहा काला कारोबार••? जुआ कांड के दाग अभी धुले नहीं और सट्टे ने पसारे पैर कोलारस पुलिस की 'मौन सहमति' से बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

कोलारस में सट्टे की पर्चियों पर लिखी जा रही पुलिस की साख! क्या TI गब्बर सिंह और SDOP मिश्रा के संरक्षण में फल-फूल रहा काला कारोबार••?

जुआ कांड के दाग अभी धुले नहीं और सट्टे ने पसारे पैर कोलारस पुलिस की 'मौन सहमति' से बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी

SDOP संजय मिश्रा, गब्बर सिंह थाना प्रभारी कोलारस 

शिवपुरी। कोलारस “क्या कोलारस में कानून की किताब बंद हो चुकी है और सटोरियों की 'पर्चियों' पर सिस्टम लिखा जा रहा है•••? जगतपुर, इंद्रा कॉलोनी और जेल रोड की गलियों में आज जो मंजर है, वह पुलिस की मुस्तैदी नहीं बल्कि थाना प्रभारी गब्बर सिंह गुर्जर और SDOP संजय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है। जब रक्षक ही 'मौन' की चादर ओढ़ ले, तो समझ लेना चाहिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

पुरानी गलतियों से क्यों नहीं सीखा सबक?

याद कीजिए पिछला 'टांग जुआ कांड'। उस वक्त भी पुलिस की साख सरेआम नीलाम हुई थी। तत्कालीन थाना प्रभारी अजय जाट को लाइन अटैच होना पड़ा था क्योंकि 60-70 लाख के जुए को पुलिस ने महज 17 हजार का दिखाया था। 10 कारें और 11 बाइकें पकड़ी गईं, लेकिन आरोपी सिर्फ 13? बाकी 30-40 लोग कहाँ गायब हो गए••? क्या उस समय की 'सेटिंग' की परंपरा को वर्तमान TI गब्बर सिंह गुर्जर और SDOP संजय मिश्रा ने विरासत के रूप में अपना लिया है••?

सफेदपोशों का संरक्षण या पुलिस की 'महीना' सेटिंग?

शहर के मुख्य इलाकों (कोर्ट रोड, जगतपुर) में सट्टे का कारोबार अब कोई गुप्त खेल नहीं रहा। छोटे-छोटे बच्चे और युवा पीढ़ी इस दलदल में बर्बाद हो रही है। जनता चीख-चीख कर कह रही है कि इन ठिकानों को रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है। लेकिन सवाल यह है कि TI गब्बर सिंह गुर्जर की नजर इन खुलेआम चलते अड्डों पर क्यों नहीं पड़ती••? SDOP संजय मिश्रा का 'इंटेलिजेंस' नेटवर्क इतना फेल क्यों है कि उन्हें शहर में पैर पसारते इस कैंसर की भनक तक नहीं••? “क्या कोलारस पुलिस केवल आम जनता के छोटे-मोटे विवाद सुलझाने और चालान काटने के लिए रह गई है••? 

जेल रोड: जहाँ 'कानून' का दम घुट रहा है

जगतपुर और जेल रोड अब सट्टे और स्मैक के 'हॉटस्पॉट' बन चुके हैं। स्थानीय लोग दहशत में हैं। जब प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) गरीबों की झोपड़ियों पर चलता है, तो इन सट्टा किंगों के आलीशान साम्राज्यों की तरफ मुड़ता क्यों नहीं••? “ क्या पुलिस किसी बड़ी वारदात या किसी घर के चिराग बुझने का इंतज़ार कर रही है••? क्या इन सटोरियों से मिलने वाला 'नजराना' इतना भारी है कि कोलारस के युवाओं का भविष्य बौना पड़ गया है••?

साहब जवाब तो देना होगा...

कोलारस की जनता अब केवल 'आश्वासन' के घुँट पीकर चुप नहीं बैठने वालीTI गब्बर सिंह गुर्जर बताएं आपके कार्यकाल में सट्टे के कारोबार में कितनी गिरावट आई या इसमें इजाफा हुआ••? और अभी तक आपने कितने लोगो पर कारवाही की जो सट्टा का कारोबार कर रहे है•••?SDOP संजय मिश्रा स्पष्ट करें: क्या आपके पास इन अवैध गतिविधियों की जानकारी नहीं है? अगर है, तो कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति क्यों•••? “पिछली बार जुआरियों को बचाने के चक्कर में थाना प्रभारी की कुर्सी गई थी। क्या वर्तमान पुलिस प्रशासन भी उसी रास्ते पर चल रहा है? अगर वक्त रहते इन "सफेदपोश माफियाओं" और उनके वर्दीधारी मददगारों पर नकेल नहीं कसी गई, तो कोलारस का इतिहास खुद को दोहराएगा और इस बार गाज और भी गिरनी तय है।


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