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बेशर्मी' की पराकाष्ठा! EOW की कार्रवाई को बीते अभी चंद दिन, अब लाइनमैन पर किसान से रिश्वत मांगने का आरोप

रविवार, 22 मार्च 2026

बेशर्मी' की पराकाष्ठा! EOW की कार्रवाई को बीते अभी चंद दिन, अब लाइनमैन पर किसान से रिश्वत मांगने का आरोप 

आवेदन खसरा पटवारी का शपथ पत्र 

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में बिजली विभाग के कारिंदों ने मानो अपनी 'लाज-शर्म' बेच खाई है। भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे इस विभाग के अधिकारियों को न तो कानून का खौफ है और न ही सरकार का डर। अभी चंद दिन पहले ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने विभाग के एक बड़े रिश्वत कांड का भंडाफोड़ किया था, लेकिन लगता है कि विभाग के साहबों ने इससे 'सबक' लेने के बजाय 'वसूली' की रफ्तार और तेज कर दी है। ताजा मामला एक गरीब किसान को प्रताड़ित कर उससे मोटी रकम ऐंठने का सामने आया है।

खेत में जबरन गाड़ा 'मौत का ढांचा', अब हटाने के नाम पर 'उगाही'

ताजा मामला करैरा तहसील के ग्राम अमोला क्रेशर का है, जहां बिजली विभाग के 'भ्रष्ट तंत्र' ने अपनी हठधर्मिता की सारी हदें पार कर दीं। किसान किसन लाल पाल के निजी मालिकाना हक वाले सर्वे नंबर 1444/4 के ठीक बीचों-बीच विभाग ने जबरन ट्रांसफार्मर (DP) और खंभे खड़े कर दिए।अंधा सर्वे या जानबूझकर साजिश••? बिना अनुमति किसान की उपजाऊ जमीन के बीचों-बीच डीपी लगाना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, अब किसान न तो वहां हल चला पा रहा है और न ही ट्रैक्टर। ऊपर से हाई वोल्टेज तारों का जाल किसी भी वक्त फसल को राख करने के लिए तैयार है।जब पीड़ित किसान अपनी फरियाद लेकर लाइनमैन गजेंद्र यादव और ठेकेदार के पास पहुंचा, तो उन्होंने गलती सुधारने के बजाय रिश्वत (पैसों) की डिमांड कर दी। किसान का सीधा आरोप है कि उससे अपनी ही जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के बदले पैसे मांगे जा रहे हैं।

अभी सूखी भी नहीं थी 'रिश्वतकांड' की स्याही, फिर शुरू हुआ खेल

हैरानी की बात यह है कि यह 'वसूली' का नया खेल तब शुरू हुआ है जब विभाग पहले से ही EOW की कार्रवाई से कलंकित है।16 मार्च को जब सूबे के ऊर्जा मंत्री शिवपुरी में डेरा डाले हुए थे, ठीक उसी वक्त EOW ने ऑपरेटर प्रवीण कुशवाह को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा था।इस कांड का मुख्य सूत्रधार जूनियर इंजीनियर (JE) सुरजीत मिश्रा निकला, जिसने एक किसान (प्रताप सिंह रावत) से कनेक्शन देने के नाम पर 44,000 रुपये डकारने के बाद भी 30,000 की और मांग की थी।सवाल यह है कि क्या विभाग के बड़े अधिकारियों ने इस कांड के बाद अपने मातहतों को 'खुली छूट' दे दी है? क्या शिवपुरी में बिजली विभाग अब जनसेवा के बजाय 'डकैती और वसूली' का आधिकारिक अड्डा बन चुका है?

लाइनमैन का 'रटा-रटाया' जवाब: "गलती हो गई, देख लेंगे"

लाइनमैन गजेंद्र यादव अब बड़ी सफाई से कह रहे हैं कि "सर्वे गलत हुआ है।" सवाल उठता है कि यह 'गलत सर्वे' करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या विभाग का नियम कहता है कि पहले गलत काम करो और फिर उसे सुधारने के नाम पर किसान की जेब काटो?

सत्ता और शासन से सीधे सवाल

ऊर्जा मंत्री जी: क्या आपके जिले में अधिकारियों ने ईमानदारी को ताक पर रख दिया है••? क्या एक किसान को अपनी ही जमीन बचाने के लिए भ्रष्ट कर्मचारियों के आगे हाथ फैलाना पड़ेगा••? क्या EOW की कार्रवाई आपके विभाग के लिए सिर्फ एक 'मामूली घटना' थी जिससे किसी ने कोई सबक नहीं लिया•••? 

“शिवपुरी का यह बिजली विभाग अब सुधरने वाला नहीं लगता। यहां 'साहबों' की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि उन्हें किसान की बर्बादी में भी अपना मुनाफा नजर आता है। अगर शासन ने अब भी इन 'सफेदपोश लुटेरों' पर लगाम नहीं कसी, तो अन्नदाता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

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