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हारने वाले नरोत्तम के सामने अब जीतने वाली चुनौती नहीं क्या राजेंद्र भारती के जाने के बाद मिश्रा' के सामने टिक पाएंगे 'यादव', या फिर पंजे के पास ही रहेगी सत्ता••? "समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं लौट कर आऊंगा, यह वादा है मेरा “नरोत्तम क्या मिश्रा की यह कविता अब सच होने वाली है ••?

रविवार, 5 अप्रैल 2026

हारने वाले नरोत्तम के सामने अब जीतने वाली चुनौती नहीं

क्या राजेंद्र भारती के जाने के बाद मिश्रा' के सामने टिक पाएंगे 'यादव', या फिर पंजे के पास ही रहेगी सत्ता••?

"समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं लौट कर आऊंगा, यह वादा है मेरा “नरोत्तम 

क्या मिश्रा की यह कविता अब सच होने वाली है ••? 

दतिया समाचार 

शिवपुरी - दतिया।बुंदेलखंड की सबसे हॉट सीट 'दतिया' में एक बार फिर चुनावी बिगुल बजने वाला है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में मिली तीन साल की सजा ने न केवल उनकी विधायकी छीन ली है, बल्कि दतिया की राजनीति में 'डॉ. नरोत्तम मिश्रा' की वापसी के द्वार भी खोल दिए हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार के समीकरण पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में झुकते नजर आ रहे हैं।

सजा से कांग्रेस को लगा बड़ा झटका

राजेंद्र भारती की अयोग्यता कांग्रेस के लिए एक बड़ा मानसिक और रणनीतिक झटका है। जिस सीट पर कांग्रेस ने बड़ी मुश्किल से कब्जा किया था, कानूनी पेचीदगियों ने उसे फिर से खाली कर दिया है। भारती के पास अब कानूनी अपील का रास्ता तो है, लेकिन सदस्यता जाने से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है।

नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी क्यों है मजबूत••?

नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकाल में दतिया की सूरत बदलने का जो दावा किया था, उसका असर धरातल पर दिखता है। मेडिकल कॉलेज, हवाई पट्टी और धार्मिक पर्यटन (पीतांबरा पीठ) का विकास, नवगृह प्रदेश का पहला सबसे बडा मंदिर उनकी बड़ी उपलब्धि माना जाता है।“संगठन पकड़ कि बात करें तो बीजेपी का मजबूत कैडर और सत्ता का समर्थन नरोत्तम मिश्रा की सबसे बड़ी ताकत है। उपचुनावों में अक्सर सत्ताधारी दल को बढ़त मिलती है, और मिश्रा की 'मैनेजमेंट स्किल' से हर कोई वाकिफ है। भीम आर्मी के नेता दामोदर यादव के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। यदि यादव दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटों में सेंध लगाते हैं, तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को और फायदा बीजेपी (नरोत्तम मिश्रा) को हो सकता है।

क्या उपचुनाव में दिखेगी सहानुभूति या विकास की जीत••?

कांग्रेस इस मामले को 'राजनीतिक प्रतिशोध' बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेगी, लेकिन बीजेपी इसे 'न्याय की जीत' और 'भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई' के तौर पर पेश कर रही है। नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता पिछले कुछ महीनों में दतिया में लगातार बनी हुई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वे इस मौके को हाथ से नहीं जाने देंगे।

कांग्रेस से कौन हो सकता है उम्मीदवार••?

चूंकि राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा हुई है, वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ पाएंगे (जब तक कि ऊपरी अदालत से सजा पर 'स्टे' न मिल जाए)। ऐसी स्थिति में कांग्रेस इन विकल्पों पर विचार कर सकती है।सहानुभूति लहर का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस राजेंद्र भारती की पत्नी या उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य को टिकट दे सकती है।दतिया जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक दांगी या किसी अन्य स्थानीय चेहरे पर भी दांव लगाया जा सकता है जो नरोत्तम मिश्रा की घेराबंदी कर सके। फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है। 

किस-किस के बीच हो सकती है 'सीधी टक्कर'••?

दतिया में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं, लेकिन मुख्य टक्कर इन दो स्थितियों में देखी जा सकती है।नरोत्तम मिश्रा (BJP) बनाम कांग्रेस उम्मीदवार,
दतिया का इतिहास रहा है कि यहाँ मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होता है। 2023 में भारती ने मिश्रा को करीब 8,000 वोटों से हराया था, इसलिए बीजेपी इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक देगी। नरोत्तम मिश्रा बनाम दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी/भीम आर्मी) यदि कांग्रेस का उम्मीदवार कमजोर पड़ता है, तो दामोदर यादव मुख्य विपक्षी चेहरे के रूप में उभर सकते हैं। यादव ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी तैयारी के संकेत दे दिए हैं, जिससे दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है।

सीधी टक्कर नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस के नए चेहरे के बीच होने की संभावना सबसे अधिक है, लेकिन दामोदर यादव की मौजूदगी इस मुकाबले को 'त्रिकोणीय' बनाकर वोटों का गणित बिगाड़ सकती है।

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