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गणतंत्र दिवस: सिर्फ एक परेड नहीं, भारत के 'पूर्ण स्वराज' और संवैधानिक शक्ति का असली सच धूमधाम से मनाया गया गणतंत्र दिवस, प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने फहराया तिरंगा

सोमवार, 26 जनवरी 2026

गणतंत्र दिवस: सिर्फ एक परेड नहीं, भारत के 'पूर्ण स्वराज' और संवैधानिक शक्ति का असली सच

धूमधाम से मनाया गया गणतंत्र दिवस, प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने फहराया तिरंगा

मुख्यातिथि के साथ कलेक्टर एस पी 

शिवपुरी। जिले में आज 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास और राष्ट्रभक्ति के माहौल में मनाया गया। मुख्य समारोह प्लेग्राउंड में आयोजित किया गया, जहाँ प्रदेश के ऊर्जा एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण के साथ किया गया। तिरंगा फहराने के पश्चात राष्ट्रगान की गूंज के बीच प्रभारी मंत्री ने खुले वाहन में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। इसके बाद पुलिस बल, एनसीसी कैडेट्स और स्काउट गाइड की टुकड़ियों ने भव्य मार्च पास्ट किया, जिसकी मुख्य अतिथि ने सलामी ली। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन भी किया।

गणतंत्र दिवस: सिर्फ एक परेड नहीं, भारत के 'पूर्ण स्वराज' और संवैधानिक शक्ति का असली सच

शिवपुरी | हर साल 26 जनवरी को जब राजपथ (कर्तव्य पथ) पर तिरंगा फहराया जाता है और सेना की टुकड़ियां कदमताल करती हैं, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई? और क्या हम वास्तव में इस दिन के "असली सच" और इसकी गंभीरता को समझते हैं?

1. 26 जनवरी ही क्यों? 1930 का वह अधूरा संकल्प

ज्यादातर लोग जानते हैं कि इस दिन संविधान लागू हुआ था, लेकिन इसके पीछे की असली वजह 'पूर्ण स्वराज' है। 26 जनवरी 1930 को लाहौर अधिवेशन में पंडित नेहरू ने तिरंगा फहराकर भारत को स्वतंत्र घोषित करने का संकल्प लिया था। 15 अगस्त को तकनीकी रूप से आजादी मिलने के बाद, उस ऐतिहासिक तारीख (26 जनवरी) की गरिमा बनाए रखने के लिए ही 1950 में इसी दिन संविधान लागू किया गया।

2. 'डोमिनियन' से 'गणतंत्र' बनने का सफर

15 अगस्त 1947 को हम आजाद तो हो गए थे, लेकिन 26 जनवरी 1950 तक हम तकनीकी रूप से ब्रिटिश शासन के 'डोमिनियन' (अधिराज्य) थे। यानी भारत का प्रमुख तब भी ब्रिटेन का राजा/रानी ही था। 26 जनवरी वह दिन है जब हमने अपना खुद का सर्वोच्च कानून (संविधान) अपनाया और भारत एक संप्रभु राष्ट्र बना, जिसका प्रमुख कोई राजा नहीं बल्कि जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि होता है।

3. संविधान का वह सच जो हम अक्सर भूल जाते हैं

संविधान केवल एक किताब नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को मिली 'सुरक्षा की गारंटी' है। गणतंत्र का असली सच यह है कि आज देश में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, संविधान से ऊपर नहीं है।

• समानता: यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक चाय बेचने वाले से लेकर एक उद्योगपति तक, सबको वोट देने का समान अधिकार प्राप्त है।

• अधिकार और कर्तव्य: गणतंत्र हमें 'अधिकार' तो देता है, लेकिन यह हम पर 'संवैधानिक कर्तव्यों' की जिम्मेदारी भी डालता है।

4. झांकियों के पीछे का संदेश

परेड में दिखने वाली झांकियां केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि वे भारत की 'विविधता में एकता' और हमारी सामरिक शक्ति का प्रतीक हैं। यह दुनिया को संदेश है कि भारत अपनी रक्षा करने में सक्षम है और अपनी परंपराओं पर गर्व करता है।

विशेष संदेश: गणतंत्र दिवस का असली उत्सव तब सफल है, जब हम संविधान में लिखे 'न्याय, स्वतंत्रता और समानता' के मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। यह दिन उत्सव के साथ-साथ आत्म-चिंतन का भी है।

                 “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक 

                              शुभकामनाएं एवं बधाइयों


प्रभारी मंत्री कलेक्टर एस पी तिरंगे को सैल्यूट करते हुए



































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