प्रशासन और माइनिंग विभाग ने डेढ़ माह पहले की छापामार कार्यवाही, लाखो रूपये का पत्थर मौके पर मिला था अब री-जांच में उसे ठिकाने लगाने की तैयारी
"जांच का ढोंग, बंदरबांट का योग: शिवपुरी में खनिज संपदा की लूट का नया सरकारी फॉर्मूला
ट्रको से माल और विभाग का 'अंधा' मोह: क्या माफिया की मौजूदगी के बिना अवैध पत्थर, अवैध नहीं रहता•••?
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| रविन्द्र चौधरी, राम सिंह सोनू श्रीवास |
शिवपुरी। जिले का माइनिंग विभाग इन दिनों नियम-कायदों की नहीं, बल्कि 'जुगाड़ और साठगांठ' की नई इबारत लिख रहा है। बम्हारी क्षेत्र में दो महीने पहले जिस अवैध खनन पर प्रशासन ने पूरे अमले के साथ छापेमारी की थी, अब उसी अवैध माल को 'वैध' बनाकर बाजार में खपाने का मास्टरप्लान तैयार कर लिया गया है। माइनिंग विभाग के आला अफसरों के तर्क इतने हास्यास्पद हैं कि मानो पूरी प्रशासनिक मशीनरी माफिया की 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' बन गई हो।
दिसंबर का 'छापा' या महज एक 'पब्लिसिटी स्टंट••?
याद दिला दें कि 10 दिसंबर 2025 को एसडीएम आनंद सिंह राजावत वन विभाग और माइनिंग विभाग की सयुंक्त टीम ने बम्हारी में जो कार्रवाई की थी, वह फाइलों में तो दर्ज है, लेकिन माइनिंग अधिकारी की याददाश्त से गायब होती दिख रही है। “क्या माइनिंग इंस्पेक्टर सोनू श्रीवास ने तब झूठ बोला था•••? उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि नरेश गुर्जर और अशोक उपाध्याय की खदानें आवंटित लीज से मीलों दूर चल रही थीं। 25-30 गाड़ी अवैध पत्थर मौके पर जप्त करने का दावा किया गया था। फिर ऐसा क्या हुआ कि दो महीने बाद विभाग की 'आंखें' बदल गईं••?
ट्रकों माल और 'साहब' की दलील: माफिया के स्वागत में बिछाए गए रेड कार्पेट!
छापेमारी के बाद खदान क्षेत्र को लावारिस छोड़ देना ही विभाग की पहली संदेहास्पद चूक थी। इसी का फायदा उठाकर खनन माफिया ने वहां करीब 50 ट्रक माल इकट्ठा कर लिया। अब इस विशाल खेप को सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए 'पुनः जांच' का कानूनी ढोंग रचा जा रहा है।जिला माइनिंग अधिकारी रामसिंह उइके का यह बयान कि "छापे के वक्त लीजधारक नहीं थे, इसलिए दोबारा जांच जायज है," विभाग की संलिप्तता का सबसे बड़ा प्रमाण है। सवाल “अगर पुलिस किसी चोर के घर से चोरी का माल बरामद करे, तो क्या पुलिस दोबारा जांच इसलिए करेगी क्योंकि चोरी के वक्त चोर घर पर मौजूद नहीं था•••? विभाग का यह तर्क न केवल हास्यास्पद है, बल्कि कानून का खुला मजाक है।
बंटवारे का गणित: रक्षक ही बने माफिया के 'मैनेजर'
सूत्रों की मानें तो इस 'पुनः जांच' की फाइल के पीछे करोड़ों का 'लेन-देन' और माल के बंदरबांट का गणित छिपा है। मूल लीज कहीं और है, पत्थर कहीं और से तोड़ा गया। अब पुनः जांच में उसी अवैध पत्थर को लीज क्षेत्र का बताकर निकासी (TP) देने की तैयारी है एसडीएम जैसे उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई को माइनिंग विभाग के अधिकारी सरेआम चुनौती दे रहे है•••? जब खदानें सील थीं, तो माफिया को वहां 50 ट्रक माल जमा करने की अनुमति किसने दी•••? “क्या उस समय की सयुंक्त रिपोर्र्ट अब कूड़ेदान में डाल दी गई है•••? “क्या जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी माइनिंग विभाग के इस 'खुले भ्रष्टाचार' पर अपनी मौन सहमति दे चुके हैं•••? “शिवपुरी में खनिज संपदा की लूट का यह नया मॉडल है—पहले छापा मारो, फिर मामला ठंडा होने का इंतजार करो, और फिर 'पुनः जांच' का कानूनी कवच देकर माफिया को मालामाल कर दो। अगर इस मामले में उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि शिवपुरी में कानून का नहीं, बल्कि 'पत्थर माफिया' का राज चलता है।
इनका कहना है
बम्हारी टोगर खदान पर पहले एस डी एम शिवपुरी आनंद रजावत और माइनिंग विभाग की टीम ने सयुंक्त कार्यवाही की थी लेकिन ज़ब टीम बम्हारी खदान पर पहुंची तब रात हो गई थी इसके अलावा दो लीज वालो ने कलेक्टर के यहां सामने द्वारा से जांच करने का आवेदन लगाया है जिस पर कलेक्टर सहाब ने द्वारा से टीम बनाई है उस टीम में एस डी एम शिवपुरी और मैं स्वयं व माइनिंग टीम, स्पेक्टर रहेंगे।
राम सिंह उईके खनिज अधिकारी

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