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SDM ने जिस लाखो रूपये के अवैध उत्खनन को पकड़ कर खदान की थी सील : अब उसे सफेद कर 'क्लीन चिट' देने की तैयारी शिवपुरी में अवैध पत्थर को 'सफेद' करने की साजिश! खनिज विभाग ने रची री-इन्वेस्टीगेशन की 'फिक्सिंग' की बिसात

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

SDM ने जिस लाखो रूपये के अवैध उत्खनन को पकड़ कर खदान की थी सील : अब उसे सफेद कर 'क्लीन चिट' देने की तैयारी 

शिवपुरी में अवैध पत्थर को 'सफेद' करने की साजिश! खनिज विभाग ने रची री-इन्वेस्टीगेशन की 'फिक्सिंग' की बिसात

रविन्द्र कुमार कलेक्टर,  राम सिंह उईके, सोनू श्रीवास 


शिवपुरी। जिले के सतनवाड़ा वन परिक्षेत्र (डोंगरी व बम्हारी) में मचे अवैध उत्खनन के तांडव पर अब खनिज विभाग ने पर्दा डालने की पूरी तैयारी कर ली है। जिस अवैध पत्थर को SDM और वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पकड़ा था, अब उसे 'सरकारी संरक्षण' में क्लीन चिट देने का खेल शुरू हो गया है।

खनिज विभाग का 'मास्टरस्ट्रोक': चोर को ही चाबी!

हैरानी की बात यह है कि जब SDM आनंद रजावत की संयुक्त टीम ने लाखों रुपये का अवैध पत्थर फर्सी जब्त कर खदानें सील की थीं, तब सच आईने की तरह साफ था। लेकिन अब खनिज विभाग के 'रहनुमाओं' ने खदान संचालकों (नरेश गुर्जर, अशोक शर्मा और राजेंद्र गुप्ता) को बचाने के लिए री-इन्वेस्टीगेशन का ऐसा जाल बुना है कि खुद कलेक्टर साहब को भी अंधेरे में रखने की कोशिश की जा रही है।

दो महीने का 'मैनेजमेंट ब्रेक' क्यों•••?

कार्रवाई के बाद दो महीने तक मामला ठंडा क्यों रखा गया•••? क्या इसलिए ताकि माफिया अपना अवैध पत्थर समेटकर लीज एरिया के भीतर डंप कर सकें•••?जांच की जिम्मेदारी फिर से उन्हीं खनिज अधिकारियों और इंस्पेक्टरों को क्यों दी गई है, जिनकी नाक के नीचे सालों से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था•••? क्या बिल्ली को दूध की रखवाली सौंपी गई है•••? सतनवाड़ा वन विभाग ने 10 बार लिखित चेतावनी दी थी, तब खनिज विभाग ने कार्रवाई क्यों नहीं की••? क्या अफसरों की जेबें माफियाओं के रसूख से भारी हो गई थीं••? 

री-इन्वेस्टीगेशन या 'पाप धोने' की मशीन?

सूत्रों का दावा है कि लीज संचालकों ने ऊपर तक भारी 'लेन-देन' कर लिया है। अब री-इन्वेस्टीगेशन के नाम पर यह रिपोर्ट तैयार की जाएगी कि जो पत्थर पहले अवैध मिला था, वह तो गलती से गिना गया था और वह लीज एरिया का ही है। यानी, वन विभाग और राजस्व की छाती चीरकर निकाला गया करोड़ों का पत्थर अब सरकारी मुहर के साथ बाजार में बिकने जाएगा। “लीज की आड़ में खेल: खदानों में अब पत्थर बचा नहीं, इसलिए लीज के बहाने सरकारी और वन भूमि को चारागाह बना लिया गया है। खनिज विभाग अब कार्रवाई करने के बजाय माफियाओं के लिए 'लीगल कंसल्टेंट' बन गया है।

क्या इस लूट पर रोक लगाइगे कलेक्टर•••?

शिवपुरी कलेक्टर के कंधों पर अब बड़ी जिम्मेदारी है। क्या वो खनिज विभाग की इस 'फिक्सिंग' वाली जांच रिपोर्ट पर भरोसा करेंगे या फिर विभाग के उन अधिकारियों पर नकेल कसेंगे जो माफियाओं के साथ मिलकर सरकार को लाखों की चपत लगा रहे हैं••? अगर बम्हारी और डोंगरी खदानों की पुनर्जांच पर रोक नहीं लगी, तो यह शिवपुरी के जंगलों और राजस्व के लिए डेथ वारंट साबित होगा।

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