शिवपुरी कलेक्टर की 'नाक' के नीचे भ्रष्टाचार का अभयदान : 21 करोड़ के घोटाले वाले RES विभाग में नियम विरुद्ध जमे पातिराम शाक्य पर प्रशासन की मेहरबानी क्यों••?
करोड़ों के भ्रष्टाचार के बाद भी बरती जा रही अनियमितताएं ऑफ़िस में बैठकर तैयार किया जा रहा डेटा कलेक्शन और ड्राइंग का सत्यापन

कलेक्टर रविंद्र कुमार, ई ई गोपाल श्रीवास्तव, पातिराम
शिवपुरी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक ओर भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' का हथौड़ा चला रहे हैं, तो दूसरी ओर शिवपुरी जिले का ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग (RES) सीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ाने का केंद्र बन गया है। सवाल यह है कि क्या शिवपुरी में जिला प्रशासन ने अपनी अलग 'रियासत' बना ली है, जहाँ नियम नहीं, बल्कि रसूखदारों की मर्जी चलती है•••?
महाघोटाले का 'महारथी': जल संसाधन का कर्मचारी RES में क्यों जमा है•••?
सहायक मानचित्रकार पातिराम शाक्य मूलतः जल संसाधन विभाग के कर्मचारी हैं, लेकिन वह पिछले कुछ सालों से वे RES विभाग में इस तरह चिपका हैं जैसे विभाग की पूरी कार्यप्रणाली उन्हीं के इशारों पर टिकी हो, कलेक्टर से सीधा सवाल: मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश थे कि मई 2025 तक सभी 'अवैध अटैचमेंट' खत्म कर कर्मचारियों को मूल विभाग भेजा जाए। फिर पातिराम शाक्य पर यह विशेष मेहरबानी क्यों•••? नियमों का कत्ल: सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 3 साल के स्थानांतरण नियम को शिवपुरी कलेक्टर ने ठंडे बस्ते में क्यों डाल रखा है?••? क्या पातिराम के पास कोई ऐसा 'अदृश्य रक्षा कवच' है जिसे भेदने की हिम्मत जिला प्रशासन में नहीं है•••?
बिना साइट विजिट 'करोड़ों' का पास: मेज पर बैठ कर विकास की 'अंतिम विदाई'!
सूत्र बताते हैं की पातिराम शाक्य बिना मौका मुआयना किए, बिना ड्राइंग के भौतिक सत्यापन और बिना ले-आउट डाले ही करोड़ों के कामों को दफ्तर में बैठकर हरी झंडी दे रहे हैं इंजीनियरिंग का मजाक: जब मानचित्रकार मौके पर जाता ही नहीं, तो डेटा कलेक्शन और ड्राइंग का सत्यापन कैसे होता है••? क्या यह भ्रष्टाचार का वह 'शॉर्टकट' है जिसे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है••? फर्जीवाड़े की नींव: बिना सत्यापन के पास हो रहे ये काम क्या आने वाले समय में एक बड़े तकनीकी घोटाले की आहट नहीं हैं•••?
21 करोड़ का 'बंदरबांट': EE और पातिराम की जुगलबंदी पर पर्दा क्यों••?
RES विभाग में 21.04 करोड़ का सामग्री भुगतान बिना किसी 'पूर्णता प्रमाण पत्र' (CC) के कर दिया गया। खुली लूट: वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में नियमों को ताक पर रखकर 2.25 करोड़ का अतिरिक्त अनियमित भुगतान किया गया। नोटिस का नाटक: संभाग आयुक्त ने कार्यपालन यंत्री (EE) को 'गंभीर वित्तीय अनियमितता' का नोटिस थमाया था। 15 दिन में जवाब मांगा गया था, लेकिन सूत्रों की मानें तो रसूख के दम पर इस पूरी फाइल को ही 'दफन' करने की तैयारी पहले से ही कर ले गई थी। इसी का कारण हैं की करीब 2 साल बाद भी नोटिस के जबाव का कोई पता नहीं की 15 दिन के नोटिस में ई ई ने क्या जबाव दिया हैं•••? जनप्रतिनिधियों की अनदेखी: भाजपा जिला महामंत्री प्रमेंद्र सोनू बिरथरे और जिला पंचायत सभापति सुनीता नवल जाटव की शिकायतों को डस्टबिन में डालना क्या कलेक्टर की कार्यशैली पर सवाल नहीं उठाता••?
कलेक्टर महोदय जवाब दें: यह 'सुचिता' है या 'लीपापोती'••?
शिवपुरी की जनता आज इन तीखे सवालों का जवाब चाहती है: क्या RES विभाग में पातिराम शाक्य के बिना काम रुक जाएगा••? यदि नहीं, तो उन्हें मूल विभाग भेजने में प्रशासन के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं••?भ्रष्टाचार का संरक्षण: क्या इन मलाईदार कुर्सियों पर जमे रहने के लिए ऊपर तक 'सुविधा शुल्क' पहुँच रहा है••? मौन का अर्थ: ईई (EE) के नोटिस का जवाब अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ? क्या प्रशासन घोटालेबाजों को बचाने के लिए सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है•••?
सुशासन की परीक्षा या भ्रष्टाचार का उत्सव••?
शिवपुरी जिला प्रशासन की चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि यहाँ नियम केवल आम जनता के लिए हैं, 'खास' लोगों के लिए तो मलाईदार विभाग और अटैचमेंट का खेल आज भी जारी है। अब देखना यह है कि डॉ. मोहन यादव के 'स्वच्छ प्रशासन' का चाबुक इन नवाबों पर चलता है या फिर शिवपुरी में भ्रष्टाचार का यह उत्सव इसी तरह चलता रहेगा।
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